IIT Topper shyam rudra pathak ji fighting for Hindi and Regional languages
नई दिल्ली। 1980 में आईआईटी प्रवेश परीक्षा में टॉप करने वाले श्याम रुद्र पाठक का बीते सौ दिनों से दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर धरना जारी है। पाठक की मांग है कि संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन करके सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषाओं को भी जगह दी जाए। सोनिया गांधी या राहुल गांधी के वहां आने पर पाठक नारे लगाते हैं जिसे रोकने के लिए, पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाता है। सौ दिन से उनकी रात रोज तुगलक रोड थाने में कट रही है।
मालूम हो कि अभी सिर्फ अंग्रेजी में तमाम जगह काम होता है। तमाम तकनीकी अड़ंगों के साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश ने कुछ छूट हासिल की है, जहां के उच्च न्यायालयों में, बेहद सीमित अर्थों में हिंदी का उपयोग हो सकता है। श्याम रुद्र इस परिपाटी की बदलना चाहते हैं ताकि आम लोग जान सकें कि उनका वकील उनकी तकलीफ का कैसा बयान अदालत में कर रहा है, क्या दलील दे रहा है और मुंसिफ महोदय का न्याय किन तर्कों पर आधारित है।
श्याम रुद्र इसे भारतीय भाषाओं का मोर्चा मानते हैं। यानी मद्रास हाईकोर्ट में तमिल में काम हो और बंबई हाईकोर्ट में मराठी में। इसी तरह यूपी सहित सभी हिंदी प्रदेशों में हिंदी में हो। सुप्रीम कोर्ट में भी हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं को जगह मिले। त्रिभाषा फॉर्मूले को लागू किया जा सकता है। कांग्रेस महासचिव आस्कर फर्नांडिज ने उनके ज्ञापन को गंभीर मानते हुए सितंबर में तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को पत्र लिखा था। ये अलग बात है कि नतीजा ठाक के तीन पात वाला रहा।बहरहाल सौ दिन से थाने में रात काटने वाले श्याम रुद्र पाठक जिस सवेरे के लिए लड़ रहे हैं उसका इंतजार 95 फीसदी भारतीयों को शिद्दत से है।
http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/14-mar-2013-edition-Faridabad-page_7-5426-104416904-244.html
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