भलाई का जमाना नही है ... आपबीती मेरी

होली पर हमने एक अनूठी योजना से कार्य आरम्भ किया था..

योजना थी
की हम 10 व्यक्ति से 25000 प्रति व्यक्ति लेंगे जिसको हम लोन के जैसे मानेंगे.
6 वर्ष की अवधि और
9% का ब्याज दर (FD वाला)

तो किश्त (EMI) बनी 451 रूपये प्रति मास प्रति 25000..

जिसको हमने तय किया की इस पैसे की जगह शुद्ध देसी गाय का घी देंगे. कितना ? 1.25 किलो

जिसको उसके हिस्से से ज्यादा घी चाहिए उसको वह खरीदना होगा 650 रूपये प्रति किलो

अब हमने जब यह सबको बताया तो काफी लोगों ने कहा की हम साथ हैं.. लेकिन हमने सिर्फ 10 ही व्यक्ति किये.. आपमें से कई लोग हैं जिनको याद आएगा की हमने 10 से ज्यादा लोगों से पैसे लेने से शुरू में मना किया ..

यह हुआ कैसे, योजना बनी कैसे ?
एक व्यक्ति २१ वर्षीय मोनू उपाध्याय इगलास गाँव से (जो हमे सुभाष पालेकर जी के कृषि शिविर में मिला था)
वह अक्सर आने जाने लगा था हमारे पास.
एक बार वह आया और बोला भाई 2.5 लाख का लोन करवा दो..
तब उससे कहा की भाई तुझे कौन लोन देगा. तू ये बता क्या करेगा तो उसने बताया की 25000 रूपये की एक गाय आएगी और ऐसी 10 गाय खरीदकर डेरी चलानी है. जिससे शुद्ध देसी घी राजीव दीक्षित जी के तरीके से बनाकर देगा.. हमें बात अच्छी लगी तो हमने पूछा भाई इसके बदले क्या दोगे तो बोला घी देंगे ..
तब हमने यह सोचा की हम 10 लोग मिलकर 2.5 लाख रूपये देते हैं बदले में हमे शुद्ध देसी घी मिलेगा ..
जो भी extra घी होगा उसको बेचने की जिम्मेदारी हमने ले ली ..
रेट पुचा तो भाई ने कहा 600 हमने 650 रखा की ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी निकलेगा उस लड़के का क्यूंकि वो दिल्ली लाकर देगा... हमारा यह सारा पैसा उस पर लोन की तरह था.. जिसमे उसको घी के रूप में किश्त देनी थी. सारा खर्च सारा प्रॉफिट सब उसका ही था. उसके घी को बेचकर हमने 1 रुपया भी नही रखा बल्कि हम तो हर महीने अपनी गाडी से 400 किलोमीटर का तेल और टोल टैक्स खर्चकर देखने जाते थे..

इस तरह से यह योजना बनी और हम सब लोग जुड़ गए.. मैंने ही सबको जोड़ा तो सारी जिम्मेदारी भी मेरी ही थी .

होली के दिन 2 गाय से शुरुआत हुई मथुरा के गाँव में ,..

4 महीने यह सब कार्य चला जिसमे गाय बढ़ते बढ़ते 13 हो गयी..

इन 4 महीनों में हर महीने मैं तो जाता ही था 1 बार, अन्य लोग एक आध बार ही गये वो भी गिनती के 2-4 लोग ..

अब दिल्ली से मथुरा की तरफ जब भी गए तो उस लड़के को बताकर ही गए और 1 घंटे के लिए ही गए.. बाकी समय मथुरा के मंदिर खुमे. विश्वास पर चल रहे थे, सोचा भी नही था की हमारे साथ कोई धोखा हो रहा होगा..

 यानि हमारी सोच थी की एक लड़का स्वावलंबी बनेगा
गाय पलेगी
गाय का शुद्ध देसी घी हम लोगों को मिलेगा

उस लड़के को हमेशा एक ही बात समझाई की शुद्धता से कभी भी समझौता नही करना क्यूंकि यही एक चीज है जो हमारे पास अलग है ..

लेकिन हुआ वही
जुलाई में अचानक बिना बताये जाने से उसकी चोरी पकड़ी गयी..
13 गाय के पैसे तब तक हम उसको दे चुके थे..
325000 रूपये कुल
लेकिन उसने तो गिनती की 6 गाय ही खरीदी थी ..
बाकी गाय पता नही उसने खरीदी बेचीं क्या किया कुछ समझ नही आया ..

तब उन गायो को दिल्ली लाकर कुछ दिन टेम्पररी जगह रखा और उसके बाद लोनी की गौशाला में दान कर दिया..
6 गाय उसने हमे लौताई  जिनको विशेषज्ञों को दिखाया तो उन्होंने कहा की यह जंगल से पकड़ी हुई गाय हैं न की खरीदी हुई..

हमने जिसको भी घी दिया उसको यह साफ़ बताकर दिया की भाई हम आगे जो व्यक्ति है उस पर भरोसा करके ही ले रहे हैं, स्वाद बेहतरीन है, हमने कोई जांच नहीं करवाई.. आप जांच करवाए और अगर गलत हो तो हमे भी अवश्य बताये..
जिन लोगों ने इस दौरान हमसे घी खरीदा उनसे हम क्षमा मांगते हैं क्यूंकि हमे आज भी नही पता की वह घी असली था या नकली ..

अब कुछ पैसे उसने लौटाए जिससे कुछ loss की रिकवरी हुई लेकिन मोटे तौर पर अच्छा नुक्सान हुआ..

उस लड़के को मारा नही पिटा नहीं क्यूंकि उससे कुछ हासिल होने वाला नहीं था..

13 गाय के पैसो में
3 गाय के पैसे मेरे अपने
1 मेरी बहन के
1 मेरे बड़े भाई के
8 अन्य अलग अलग लोगों के..

उसका जो विडियो हमने बनाया वह भी अपलोड कर देंगे..

आप अपनी बात कहें / राय दे

अब इस काम से अपना विश्वास भी टुटा और अपना नाम भी खराब हुआ ...

अब शायद दुबारा किसी पर भरोसा करके काम न कर पाएं .. क्यूंकि भलाई का जमाना नहीं है अब..

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