बोया पेड़ बबूल का

जब बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होये ।

जो माता पिता अपने बच्चों के मन्दिर न जाने से दुखी हैं।

जो अपने बच्चों के पिज़्ज़ा बर्गर खाने से दुखी हैं

जो अपने बच्चों के अपनी बात न सुनने से दुखी हैं

जो अपने बच्चों के अय्याशी करने से दुखी हैं

वो एक बार यह सोचे
की अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने किसने भेजा ?
क्या वहां उसको भारतीय धर्म और संस्कृति की एक भी पुस्तक पढ़ने को मिली या फिर आपने ही कभी गलती से उसको यह सब पढ़ाया बताया समझाया ? नही न
क्या आपने उसको कभी अपने साथ प्रतिदिन मन्दिर जाने की आदत डलवाई ?

क्या आपने उसको ताजे भोजन के फायदे व् फ़ास्ट फ़ूड की सच्चाई बताई ?

क्या आपने उसको भारत के असली इतिहास को पढ़ाया या समझाया ? आप ही को नही पता तो आप आगे क्या बताओगे ।

क्या कहा समय नही था ?

बहुत अच्छे
अब भुगतो अपने बनाये हुए उत्पाद को ।

जो शरीर से हिन्दू है लेकिन उसका मन मस्तिष्क पूर्णतः अंग्रेजी है
क्योंकि वो उनकी शिक्षा पद्धति पर अंग्रेजी स्कूल में पढ़ा।
आपने टीवी देखने के लिए समय निकाला लेकिन बच्चे को पढ़ाने या संस्कारी बनाने के लिए कुछ नही किया ।

आपने कमाने पर इतना ध्यान दिया की बच्चे की ट्यूशन लगवा दी, स्कूल भेज दिया और हो गयी जिम्मेदारी पूरी।

नुक्सान आपका नही हुआ सिर्फ
नुक्सान आपने देश का भी कर दिया।

अब आप तो भुगतोगे ही।
देश भी भुगत रहा है इन काले अंग्रेजो को ।

जिन्हें o god कहना सही लगता है हे भगवान में अजीब लगता है।

o shit इनका डायलाग है

जिन्हें hi hi हिजड़ो वाला सही लगता है लेकिन राम राम या नमस्ते या प्रणाम अजीब लगता है 
good morning
sir
madam
इन शब्दों का असल अर्थ क्या है ये तो शायद आप भी नही जानते तो बच्चों को क्या सिखाएंगे।

बोया पेड़ बबूल का
तो आम कहाँ से होये।

थोडा रूककर सोचिये की बच्चे से जो आप उम्मीद करते हैं वो आपने उसको कभी दिया क्या ?
समय भी और उस को संस्कार भी । यह आपका ही कार्य है।

टीचर या ट्यूशन में यह सब नही मिलेगा।

Comments

Popular posts from this blog

धर्म के दस लक्षण

कट्टर सोच की अँधेरी गुफा

101 स्वदेशी चिकित्सा 1 राजीव दीक्षित