भारत का धीरे धीरे इस्लामीकरण

भारत इस्लामी गुलामी की और लगातार बढ़ रहा है। स्वयं से नही
बल्कि मुसलमानो के द्वारा
राजनेताओ के द्वारा
सेक्युलर हिन्दुओ द्वारा

सन् 634 से सन् 695 तक भारत पर पहले 10 इस्लामी हमले हुए जो भारत जीता।

711-712 में ब्राह्मण समाज की भ्रस्टाचार व् लूट की नीतियों से और कुछ विश्वासघातियों के कारण राजा दाहिर जून 712 में हारे।

सन् 636 से सन् 1206 तक भारत में इस्लामी राज्य स्थापित नही होने दिया।

1206 से 1757 तक भारत के कुछ भागों में मुसलमानो का राज्य रहा, सम्पूर्ण भारत में कदापि नही। अन्यथा आप और हम आज हिन्दू नही होते।

इनसभी से 500 वर्षों तक राणा कुम्भा राणा सांगा महाराणा प्रताप शिवाजी महाराज  गुरु अंगददेव गुरु तेग बहादुर गुरु गोबिंद सिंह जी और अन्य अनेको क्रान्तिकारियो ने मुस्लिम शासन के खिलाफ संघर्ष किया ।

1757 में अंग्रेज आ चुके थे । 1857 में पहला संग्राम हुआ अंग्रेजो के खिलाफ।

तब भी मुसलमानो ने खोई सत्ता पाने का प्रयास किया।
अंत में 1947 में मुसलमान भारत के 2 टुकड़े (आज का पाकिस्तान और बांग्लादेश) का इस्लामी राज्य बनाने में कामयाब हुए। गांधी नेहरू और कांग्रेस ने मिलकर हिन्दू और मुसलमान के आधार पर ये टुकड़े मुसलमानो को दिए ।

हिन्दुओ भूलो मत 1947 में देश आजाद नही हुआ बल्कि भारत का विभाजन हुआ जिसका एक भाग पाकिस्तान के नाम से मुसलमानो को दे दिया गया और शेष भारत की सत्ता मुस्लिम परस्त गांधी नेहरू कांग्रेस को दे दी गयी।

सवाल यह उठता है
की पाकिस्तान मुस्लिम देश बना तो भारत हिन्दू देश क्यों नही बना ?
क्यों भारत और पाकिस्तान के हिन्दू मुस्लिम आबादी की अदला बदली नही की गयी। इसका जवाब है  भारत का इस्लामीकरण। 

यह हिन्दू भारत के विरुद्ध एक सुनियोजित षड्यंत्र था जिसके  फलस्वरूप कांग्रेस भारत में बसे मुसलमानो के सहारे लम्बे समय तक राज कर सकें और बाद में इस एहसान के बदले में शेष भारत को भी मुसलमानो को दे सके । पाकिस्तान और बंगलादेश में तो हिन्दू नाम मात्र के ही शेष हैं लेकिन भारत में यह 14% पहुँच चुके हैं।

भारत के पहले प्रधानमन्त्री नेहरू ने यह डील की थी मुस्लिम समाज के साथ। वह संस्कृति से मुसलमान और हिन्दुओ के कटु आलोचक थे ।

अगले प्रधानमन्त्री इंदिरा जो मुस्लिम फिरोज खान की मुस्लिम बेगम थी जिन्होंने अपने अपने नाम ही बदले इस्लाम धर्म नही छोड़ा।

राजीव गांधी को सोनिया से विवाह करने के लिए मुस्लिम से ईसाई बनना पड़ा ।

केंद्र सरकार व् राज्य सरकार द्वारा भारत के इस्लामीकरण में योगदान (वोट बैंक की राजनीती के कारण )

1 विश्व में सभी इस्लामी देश हज यात्रा के लिए कुछ नही देते लेकिन भारत सरकार प्रत्येक व्यक्ति को 28000 रूपये की आर्थिक सहायता देती है। हाजियो के लिए राज्यो में हज हॉउस बनाये गए हैं।

2 वक्फ बोर्ड को सरकार आर्थिक सहायता देती है जबकि वक्फ बोर्ड के पास 12 लाख करोड़ की सम्पत्ति हो चुकी है (भारत के सालाना बजट का 75% होता है 12 लाख करोड़)। इनकी वार्षिक आय है 12000 करोड़।

3 मदरसा सरकार ने धार्मिक कट्टरवाद एवम् अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली मदरसा शिक्षा को न केवल दोषमुक्त बताया बल्कि उसके आधुनिकरण के नाम पर प्रति वर्ष करोड़ो रूपये आर्थिक सहायता देती है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 300 अंग्रेजी माध्यम के मदरसा खोले ।
सरकार ने जामिया मिलिया पर आरक्षण लागु नही होने दिया ।
अलीगढ विश्वविद्यालय को अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय बने रहने दिया।
25 लाख रूपये के वजीफे अल्पसंख्यक के नाम पर कक्षा 1 से 12 तक।
केरल सरकार मौलवियों को पेंशन देती है जैसे की वो सरकारी नौकर हो।
बिहार में 10 कक्षा पास करने पर प्रत्येक मुस्लिम छात्र को 10000 रूपये पुरस्कार मिलता है
राजस्थान में मुस्लिम विद्यार्थी प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ते समय भी छात्रवृति ले सकते है।
फातिमा समिति की सिफारिशों के बाद 1-12 कक्षा तक की पुस्तके उर्दू में तैयार होती हैं। अध्यापक भी उर्दू में पढ़ाते हैं।

अटल वाजपेयी जी की बीजेपी सरकार द्वारा निकाले गए हिन्दू विरोधी और मुस्लिम उन्मुख अंशो को दुबारा पाठ्यपुस्तकों में डाला गया।

सरकार ने अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पांच केंद्र भोपाल, पुरी, किशनगंज बिहार, मुर्शिदाबाद बंगाल, मल्लूपुरम केरल में खोलने के लिए 2000 करोड़ का अनुदान दिया।

अल्पसंख्यको के mphil और phd करने वाले 786 विद्यार्थियो को राष्टीय पात्रता परीक्षा या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा के बिना 12 से 14 हजार रूपये महीना रिसर्च फ़ेलोशिप मिलेगी।
जबकि अन्य लोगो को पास होना अनिवार्य है।

उच्च प्रोफेशनल कोर्सो को पढ़ने वाले अल्पसंख्यक विद्यार्थीयो की फीस सरकार देगी ।

स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओ के कोचिंग के लिए फीस भी सरकार देगी।

4 राजनैतिक
11रवीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यको के नाम पर विशेषकर मुसलमानो के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया गया और उसके लिए 15% बजट रखा गया ।

2004 में कांग्रेस ने सत्ता में आते ही पोटा कानून निरस्त कर दिया जिससे आतंकवाद के जुर्म में फंसे मुसलमान बच सकें।

मुस्लिम पर्सनल कानून और शरीयत कौर्ट का समर्थन किया

17 देसम्बर 2006 को प्रधानमंत्री मनमोहन बोला की भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानो का है।

5 आर्थिक
मुसलमानो के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए 5460 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया।

सस्ती ब्याज दर पर ऋण देने के लिए एक कारपोरेशन अलग से बनाया गया

RBI ने बैंको को आदेश दिया इनको ऋण देने में उदारता बरते बैंक। इसकी निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमिटी भी काम करेगी। 2006 में

अल्पसंख्यक विद्यार्थीयो को minority development and finance corp से 0-3 % ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग के बजट में से 30 % आवंटन मुसलमानो के लिए है।

13 अगस्त 2006 को सरकार ने लोकसभा में बतलाया की मुस्लिम प्रभाव वाले 90 जिलो और 338 शहरो में मुसलमानो के लिए विशेष विकास फंड का प्रावधान किया गया है।

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