RTI से खुलासा Diesel पर 2014 में टैक्स १००% तक
०२ जून २०१४ को RTI लगाईं:-
की भारत में डीजल और पेट्रोल किस दाम पर खरीदा जाता है ?
उसपर कितना टैक्स लगता है ?
और उसपर तेल बेचने वाली कंपनी को सब्सिडी क्यूँ और कैसे डी जाती है ?
तेल बेचने वाली कंपनी जब इतना मुनाफा कमाती हैं तो सब्सिडी क्यूँ ?
जवाब डीजल का तो आ गया..
पेट्रोल का गोलमोल जवाब आया है जिससे कुछ भी समझ नहीं आया..
मैंने अपना विश्लेषण किया तो नतीजे ये निकले..
१६ जुलाई २०१४ का रुपया प्रति डॉलर भाव था ५९.२२
तेल बेचने वाली कंपनी ने तेल ख़रीदा ४५.७९ रूपये प्रति लीटर. (इसमें तेल का दाम ९५.९०%, महंगा दाम (शायद रिश्वत होगी)1.६९%, गुणवत्ता की कीमत ०.११% (ये भी बेफालतू का खर्च लगता है), 1.३८% भाड़ा तेल को गल्फ से भारत के पोर्ट पर लाने के लिए, ०.९२% बिमा पोर्ट खर्चा इत्यादि है..
अब तेल उन दिनों बेचा गया ५७.८४ रूपये प्रति लीटर के दाम से दिल्ली में....
यानि २५.८१% ऊँचे दाम से..
अब इस २५.८१% में क्या क्या जोड़ है ये समझते हैं..
1 कस्टम ड्यूटी यानि टैक्स २.५८%
२ स्पेसिफिक एक्साइज ड्यूटी यानि टैक्स ७.७७% (३.५६ रूपये प्रति लीटर ये ड्यूटी है. अगर तेल का दाम १० रूपये भी हो तो ये ड्यूटी ३.५६ रूपये प्रति लीटर हि लगेगी यानि तब ३५.६०% की ड्यूटी निकलेगी)
३ वैट यानि एक और टैक्स १३.९२% (ये वैसे तो १२.५% है लेकिन तेल के दाम में खर्चे वगरह जोड़ने के बाद १२.५% असल में १३.९२% आता है
४ हवा की शुध्त्ता का टैक्स (एयर अम्बिएंस चार्ज के नाम पर ) ०.५५%
यानी मोटा मोटा सिर्फ 1 % को छोड़कर सारा भार टैक्स के रूप में है..
उसमे से सब्सिडी, २% डीलर comission, विज्ञापन का खर्च तेल मार्केटिंग कम्पनीज का, मुनाफा तेल कंपनी का बाकी सब ड्रामा करके देश को बेवकूफ बनाया जाता है..
मोटा मोटा बात करें तो ४० रूपये की वस्तु पर सरकार १० रूपये टैक्स वसूल लेती है वो भी प्रति लीटर..
११७ डॉलर प्रति बैरल की कैलकुलेशन की शीत निचे संकलित है..
उसमे आप ६७ डॉलर का भाव डालो तो सीधे सीधे समझ आएगा की क्या लूट हम सबकी चल रही है..
भारत में २०१२ में १७५०००००० लीटर डीजल प्रति दिन की खपत थी..
यानि इसको टैक्स के अनुपात में देखें तो २५% टैक्स के अनुसार १७५ करोड़ रूपये का प्रति दिन का टैक्स...
और १००% टैक्स के अनुसार ७०० करोड़ रूपये का प्रति दिन का टैक्स वो भी सिर्फ और सिर्फ डीजल पर..
पेट्रोल और गैस तो अभी निकाला हि नहीं..
वो भी हर आदमी से बिना किसी इनकम डिफरेंस के .. गरीब से गरीब और आमिर से आमिर एक हि रेट पर टैक्स देता है भारत सरकार को, हर रोज... हर वस्तु की खरीद में क्यूंकि डीजल से हि सारा ट्रांसपोर्ट system चलता है..
कितनी बड़ी लूट हम सबकी हमारी सरकार करती है और बेवकूफ बनाती है की डीजल से तेल कंपनी या सरकार को नुक्सान हो रहा है..
४० की चीज खरीद कर ५० या ८० में बेचने से किस तरह नुक्सान होता है ये हमारी लुटेरी अर्थव्यवस्था को चलाने वाले हि समझा सकते हैं...
निचे कुछ फोटो हैं जो की मेरी RTI का जवाब सरकार ने दिया है जिससे मैंने ये निष्कर्ष निकालें हैं.. आपको कुछ संशय हो तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं..
वन्दे मातरम
नवनीत सिंघल
की भारत में डीजल और पेट्रोल किस दाम पर खरीदा जाता है ?
उसपर कितना टैक्स लगता है ?
और उसपर तेल बेचने वाली कंपनी को सब्सिडी क्यूँ और कैसे डी जाती है ?
तेल बेचने वाली कंपनी जब इतना मुनाफा कमाती हैं तो सब्सिडी क्यूँ ?
जवाब डीजल का तो आ गया..
पेट्रोल का गोलमोल जवाब आया है जिससे कुछ भी समझ नहीं आया..
मैंने अपना विश्लेषण किया तो नतीजे ये निकले..
१६ जुलाई २०१४ का रुपया प्रति डॉलर भाव था ५९.२२
तेल बेचने वाली कंपनी ने तेल ख़रीदा ४५.७९ रूपये प्रति लीटर. (इसमें तेल का दाम ९५.९०%, महंगा दाम (शायद रिश्वत होगी)1.६९%, गुणवत्ता की कीमत ०.११% (ये भी बेफालतू का खर्च लगता है), 1.३८% भाड़ा तेल को गल्फ से भारत के पोर्ट पर लाने के लिए, ०.९२% बिमा पोर्ट खर्चा इत्यादि है..
अब तेल उन दिनों बेचा गया ५७.८४ रूपये प्रति लीटर के दाम से दिल्ली में....
यानि २५.८१% ऊँचे दाम से..
अब इस २५.८१% में क्या क्या जोड़ है ये समझते हैं..
1 कस्टम ड्यूटी यानि टैक्स २.५८%
२ स्पेसिफिक एक्साइज ड्यूटी यानि टैक्स ७.७७% (३.५६ रूपये प्रति लीटर ये ड्यूटी है. अगर तेल का दाम १० रूपये भी हो तो ये ड्यूटी ३.५६ रूपये प्रति लीटर हि लगेगी यानि तब ३५.६०% की ड्यूटी निकलेगी)
३ वैट यानि एक और टैक्स १३.९२% (ये वैसे तो १२.५% है लेकिन तेल के दाम में खर्चे वगरह जोड़ने के बाद १२.५% असल में १३.९२% आता है
४ हवा की शुध्त्ता का टैक्स (एयर अम्बिएंस चार्ज के नाम पर ) ०.५५%
यानी मोटा मोटा सिर्फ 1 % को छोड़कर सारा भार टैक्स के रूप में है..
उसमे से सब्सिडी, २% डीलर comission, विज्ञापन का खर्च तेल मार्केटिंग कम्पनीज का, मुनाफा तेल कंपनी का बाकी सब ड्रामा करके देश को बेवकूफ बनाया जाता है..
मोटा मोटा बात करें तो ४० रूपये की वस्तु पर सरकार १० रूपये टैक्स वसूल लेती है वो भी प्रति लीटर..
जब कच्चा तेल ११७.९ डॉलर प्रति बैरल था (1 बैरल में १५९ लीटर होते हैं) तब देश में डीजल ५७ रूपये प्रति लीटर बिकता था..हमने जब इस साडी कैलकुलेशन को एक्सेल में निकाला (मोटे तौर पर) तो अब ६७ डॉलर प्रति बैरल का भाव है (सरकारी आंकडें http://www.bharatsamachaar.com/2014/12/04-12-2014-6798.html) यानि डीजल की कीमत सिर्फ २७ रूपये प्रति लीटर तक है.. (बाकी खर्चे बढे हुए दाम वाले हि रखे तब भी सिर्फ २७ रूपये) लेकिन सरकार बेच रही है ५३-५५ रूपये लीटर... यानी टैक्स की लूट कितनी है पुरे पुरे १००% प्रति लीटर.. २७ का माल ५४ में बेचोगे तो १००% का मुनाफा होता है..
११७ डॉलर प्रति बैरल की कैलकुलेशन की शीत निचे संकलित है..
उसमे आप ६७ डॉलर का भाव डालो तो सीधे सीधे समझ आएगा की क्या लूट हम सबकी चल रही है..
अब ये भी समझें..
भारत में २०१२ में १७५०००००० लीटर डीजल प्रति दिन की खपत थी..
यानि इसको टैक्स के अनुपात में देखें तो २५% टैक्स के अनुसार १७५ करोड़ रूपये का प्रति दिन का टैक्स...
और १००% टैक्स के अनुसार ७०० करोड़ रूपये का प्रति दिन का टैक्स वो भी सिर्फ और सिर्फ डीजल पर..
पेट्रोल और गैस तो अभी निकाला हि नहीं..
वो भी हर आदमी से बिना किसी इनकम डिफरेंस के .. गरीब से गरीब और आमिर से आमिर एक हि रेट पर टैक्स देता है भारत सरकार को, हर रोज... हर वस्तु की खरीद में क्यूंकि डीजल से हि सारा ट्रांसपोर्ट system चलता है..
कितनी बड़ी लूट हम सबकी हमारी सरकार करती है और बेवकूफ बनाती है की डीजल से तेल कंपनी या सरकार को नुक्सान हो रहा है..
४० की चीज खरीद कर ५० या ८० में बेचने से किस तरह नुक्सान होता है ये हमारी लुटेरी अर्थव्यवस्था को चलाने वाले हि समझा सकते हैं...
निचे कुछ फोटो हैं जो की मेरी RTI का जवाब सरकार ने दिया है जिससे मैंने ये निष्कर्ष निकालें हैं.. आपको कुछ संशय हो तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं..
वन्दे मातरम
नवनीत सिंघल




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