सच्चे स्वराज की रुपरेखा २

 

 

भाई राजीव दीक्षित जी के विचार. (अर्थव्यवस्था का स्वदेशी करण, रूपये का पुनः मूल्यांकन अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में, काला धन)

राष्ट्रीय मुद्दे जिन पर हम सबको मिलकर जानना चाहिए, फिर इन पर बात करनी चाहिए. फिर जो निष्कर्ष निकले उसको सबकी सहमति से देश के नीति निर्धारकों तक पहुँचाना चाहिए. तब हम कह सकते हैं की हमारा देश हमारे हाथ में है. स्वराज सही अर्थों में आ गया है.

देश की जनता जागरूक हो, समझदार हो, और नीति बनाने में भागीदारी होगी तब जाकर भारत विश्व में अपना स्थान बना सकता है.

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