बासमती चावल की खेती
वन्दे मातरम साथियों,
हमने जीवन में पहली बार खेती की और शुरुआत हुई बरसात के मौसम से इसलिए चावल को हमको चुनना पड़ा. चावल की खेती में हमने काफी ग़लतियाँ की जिससे पैदावार पर भी फर्क पड़ा और हमारे बजट पर भी. हम नहीं चाहते की कोई और नया किसान ये ग़लतियाँ करे इसलिए यह लेख लिख रहा हूँ.
बहुत ही जरूरी चीजें:-
- खेत को समतल करें. (ताकि खेत में पानी भरा जा सके और बारिश का पानी रोका जा सके).
- खेत को कई हिस्सों में बांटें (मेड बनाये)
- खेत में नाली का सिस्टम इस तरह से बनाये की पानी सीधा आपके ट्यूब वेल से खेत के हर कोने में पहुँच सके (इसलिए खेत का समतल होना और मेड बनाना जरूरी है )
- प्राकृतिक खेती में कोई भी फसल (चावल) को सही समय पर लगाना बहुत ही जरूरी है. मानसून शुरू होने से पहले यानी १५ मई तक आपका बीज ज़मीन में डल जाना चाहिए. (चाहे आप पौध लगायें या सीधे बिजाई करें.
- खेत को कद्दू कर लें (रोटावेटर से काफी अच्छा होगा )
- सीधी बिजाई (बिना पौध लगाये), में ३-५ बीज एक साथ बोयें.
- पौधों में दुरी ५ ऊँगली से ज्यादा न हो (अन्यथा पैदावार तो कम होगी ही, खरपतवार भी बहुत होगा, जिससे लेबर का खर्चा बढ़ जायेगा).
- पौध लगाना मतलब एक १० गज प्रति एकड़ में बीज को छिटक कर बो देना, एक महीने बाद पौध को उखाड़ कर पुरे खेत में लेबर द्वारा रोपाई करवाना. यहाँ पर लेबर पर नजर रखना बहुत आवश्यक है क्यूंकि पूरी जमीन का इस्तेमाल तब ही होगा जब पौधों की दुरी ५ ऊँगली से ज्यादा न हो.
- पहले २ महीने पानी भरकर रखने से खरपतवार पैदा नहीं होगा और लेबर का खर्चा बचेगा.
- प्राकृतिक खेती की दवाइयां पहले से बनाकर रखें और जैसे ही बिमारी दिखे तुरंत दावा का छिडकाव करें. (फफूंद सबसे ज्यादा लगती है, इसके लिए ६ दिन पुराना दही / लस्सी ३ लीटर और १०० लीटर पानी प्रति एकड़ पौधों पर छिडकाव करें )
- समय पर खाद डालें (हर १५ दिन में)
- समय पर छिडकाव करें (हर २१ दिन में )
- फसल कटने से १ महिना पहले खट्टी लस्सी का छिडकाव करें.
- फसल काटने पर ३-५ दिन धुप लगायें. उसके बाद ही बोरियों में भरें.
- धान को चावल बनाने में काफी wastage होता है. २/३ हिस्सा चावल बचता है, उसमे भी कुछ हिस्सा टुटा चावल होता है. धान को शेलर मशीन से निकालकर चावल बनाया जाता है.
- १०० किलो धान में से ६६% चावल मिलेगा, बाकी उसका छिलका होगा.
- बासमती धान ११२१ का मंडी भाव ४०-४५ रूपये किलो होता है, जिसका मतलब चावल का भाव ६०-७० रूपये किलो हुआ. (न ही शेलर का खर्चा, न ट्रांसपोर्ट का ).
- यह चावल आप ६ महीने या कम से कम १ साल तक नहीं खा सकते (खीर या खिचड़ी में खा सकते हैं) क्यूंकि जब ये बनेंगे तो चिपचिपा सा रहेगा.
- इसलिए इसको मंडी में बेचना ज्यादा लोग बेहतर समझते हैं.
हमने जो गलतियां की वो इस प्रकार हैं :-
- खेत समतल नहीं था. (पानी नहीं पहुंचा हर जगह)
- मेड पक्की नहीं थी. (पानी नहीं रुका)
- नाली सिस्टम नहीं था. (पानी नहीं पहुंचा हर जगह)
- फसल एक महिना देरी से लगाईं. (कम पैदावार)
- पौधों की दुरी १० ऊँगली से भी ज्यादा पर थी. पूरी जमीन का इस्तेमाल नहीं किया. (५०% पैदावार)
- खरपतवार बहुत हुआ, लेबर का खर्चा भी बहुत हुआ. (कम पैदावार, फालतू खर्चा)
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