Anshan against Corruption lost heroes of India

भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन के दौरान संत निगमानंद की जान गई

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स्वामी निगमानंद जी
स्वामी निगमानंद जी
एक दुखद खबर देहरादून से है. साधु निगमानंद की मौत हो गई. वे अनशन पर थे और कोमा में चले गए थे. उनका इलाज हिमालयन अस्पताल में चल रहा था. निगमानंद ने 19 फरवरी को अनशन शुरू किया था. वे दो मई को कोमा में चले गए थे. उसके बाद उनका उपचार किया जाता रहा पर वे वापस नहीं लौटे.
निगमानंद हरिद्वार के मातृ सदन आश्रम से ताल्लुक रखते थे. उनकी उम्र 36 साल थी. वे गंगा में खनन बंद करने की मांग कर रहे थे. साथ ही हिमालयन स्टोन क्रेशर को कुंभ क्षेत्र से हटाने की मांग पर भी अड़े थे. उधर, साधु के समर्थकों ने आरोप लगाया है कि निगमानंद को जहर देकर मारा गया है. प्रशासन शव का पोस्टमार्टम करा रहा है ताकि मौत के असल कारणों का पता चल सके. मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने थाने में 11 मई को ही शिकायत दर्ज कराई थी कि 30 अप्रैल को इलाज के दौरान निगमानंद को जहर दे दिया गया. इसी कारण वह 2 मई को कोमा में चले गए.
स्वामी शिवानंद ने हरिद्वार के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ . पीके भटनागर और क्रेशर के मालिक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी. स्वामी शिवानंद के मुताबिक निगमानंद को 30 अप्रैल को एक इंजेक्शन लगाया गया था. उसके बाद वह दो मई को कोमा में चले गए. आरोप है कि इंजेक्शन में निगमानंद को 'आर्गेनो फास्फेट' दिया गया. कांग्रेस विधायक किशोर उपाध्याय ने निगमानंद की मौत के लिए उत्तराखंड सरकार को जिम्मेदार बताया है. उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री निशंक बाबा रामदेव का अनशन तुड़वाने के लिए बेहद सक्रिय रहे पर उसी अस्पताल में इलाज करा रहे निगमानंद को देखने तक नहीं गए.
ज्ञात हो कि निगमानंद गंगा रक्षा हेतु वर्ष 2008 में भी 73 दिन का आमरण अनशन कर चुके थे. उस अनशन के कारण उनके शरीर के कई अंग कमजोर हो गए. उनमें न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर के लक्षण भी देखने को मिले. उन्होंने दुबारा इसी साल 19 फरवरी से आमरण अनशन शुरू किया और 68वें दिन उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन्हें गिरफ्तार कर जिला चिकित्सालय, हरिद्वार में दाखिल किया गया पर लंबे अनशन से उन्हें दिखाई और सुनाई देना कम हो गया.
2 मई को अचानक वे कोमा में चले गए. जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पीके भटनागर कोमा को संत निगमानंद की गहरी नींद बताते रहे. काफी मेहनत के बाद संत को  देहरादून स्थित अस्पताल में भेजा गया. बाद में उन्हें जौली ग्रांट के हिमालयन अस्पताल में दाखिल कराया गया. पर वे बच नहीं सके. सूत्रों का कहना है कि हिमालयन अस्पताल में हुई जांच में पता चला कि संत के शरीर में  ऑर्गोनोफास्फेट कीटनाशक मौजूद है. इसी के बाद आरोप लगा कि संत निगमानंद को जहर दिया गया है.

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