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Showing posts from August, 2015

Rakhi Rakshabandhan / राखी रक्षाबंधन

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रक्षाबंधन का त्यौहार 29 अगस्त को है, शहर के बाजार सज चुके हैं, ग्रहों व नक्षत्रों का संयोग भी इस बार खास बहनों के लिए बना है। रक्षाबन्धन   होली ,  दीवाली  और  दशहरे  की तरह हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। यह भाई-बहन को स्नेह की डोर से बांधने वाला त्योहार है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन का अर्थ है (रक्षा+बंधन) अर्थात किसी को अपनी रक्षा के लिए बांध लेना। इसीलिए राखी बांधते समय बहन कहती है - 'भैया! मैं तुम्हारी शरण में हूँ, मेरी सब प्रकार से रक्षा करना।' आज के दिन बहन अपने भाई के हाथ में राखी बांधती है और उन्हें मिठाई खिलाती है। फलस्वरूप भाई भी अपनी बहन को रुपये या उपहार आदि देते हैं। रक्षाबंधन स्नेह का वह अमूल्य बंधन है जिसका बदला धन तो क्या सर्वस्व देकर भी नहीं चुकाया जा सकता। श्रावण  शुक्ल की  पूर्णिमा  को भारतवर्ष में भाई - बहन के प्रेम व रक्षा का पवित्र त्योहार 'रक्षाबन्धन' मनाया जाता हैं। सावन में मनाए जाने के कारण इसे सावनी या सलूनो भी कहते हैं। भ्रातप्रेम को प्रगाढ़ बनाता रक्षाबंधन का पर्व भाई व बहन के अनकहे स्नेह -...

नकली साईं बाबा

आज एक दूकान पर चर्चा थी की साईं बाबा नकली है और शन्कराचार्य ने ऐसा कहा है। फिर एक ठेला भी बगल से गुजरा जिसमें साईं बाबा के भजन लगाकर घर घर से दान माँगा जा रहा था। लेकिन किसी ने भी दान नही दिया। दिल को लगा की वैसे तो ये शंकराचार्य नकली है लेकिन आज इसने एक सही बात कही है वो भी एक ऐसे माध्यम से जिसे दुनिया देखती है। टीवी । येही सही समय है दोस्तों खुलकर सामने आ जाओ और बताओ सबको इस नकली साईं बाबा की सच्चाई। साईं कोई अच्छा इंसान था या नही वो मैं नही जानता लेकिन वो एक भगवान नही था। ये तो भारत की अंधभक्ति का फायदा उठाकर किसी को भी रातोरात भगवान बना देती है मीडिया। ये वोही भारत है जिसमे मुस्लिम बलात्कारियों की , मुस्लिम फकीरों की (जो जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाते थे), मुस्लिम आक्रान्ताओ की मजार पर हिन्दू माथा टिकाते है। जिस देश में अकबर को अच्छा समझा जाता है, शिवाजी महाराज व् झाँसी की रानी के बलिदान को समझा ही नही जाता की क्यूँ और किसकी वजह से ये वीर रणभूमि में शहीद हुए। जिस देश में ऐसे राज्खराने जिन्होंने अंग्रेजो की चापलूसी की, देशभक्तों को मरवाया वो इस देश की संसद में बैठते आये हैं। वाकई मेर...

मुल्ले इसाई व् यहूदी सब एक ही हैं अधर्मी

चिरकाल से ही सत्य सिर्फ एक है। सत्य वोही जिसको सब माने। सत्य में कोई मत हो ही नही सकता। जैसे सूर्य रौशनी देते हैं यह एक सत्य है। ऑक्सीजन से हम जीते हैं भोजन हम सबको चाहिए पानी भी उसी प्रकार शुरू से ही धर्म एक ही है। दूसरा कुछ जैसे सत्य के खिलाफ झूठ होता है वैसे ही धर्म के खिलाफ अधर्म है। धर्म क्या है ? प्रकृति के नियम का पालन करना ही धर्म है। अधर्म इसके विपरीत। सनातन धर्म में हिन्दू , सिख, बौध, जैन आते हैं अधर्म में मुस्लिम, यहूदी, व् इसाई आते हैं क्या आप जानते हो यहूदी , इसाई और मुसलमान एक ही हैं ? जैसे हिन्दू सिख जैन और बौध एक हैं । कुछ उदाहरण ले लेते हैं हमारे यहाँ जलाते हैं इनके यहाँ दफनाते हैं हमारे यहाँ पुनर्जन्म इनके यहाँ एक ही जन्म हमारे यहाँ नारी की पूजा इनके यहाँ भोग की वस्तु हमारे यहाँ कोई भी भगवान सब एक हैं इनके यहाँ इनका ही अपना भगवान हैं बाकी सब तो काफ़िर इत्यादि हैं हमारे यहाँ  मांस नही खाते इनके यहाँ अधर्म के अनुसार मांस काटना एक त्यौहार है। पहले जो राक्षस पिशाच होते थे उनके सिंग बड़े लम्बे दांत डरावना चेहरा होता था क्या ? जो सनातन धर्म के देवी देवता हैं या सिखों के ग...

Galileo ko faansi kyun hui ??

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भारतवर्ष सदा से ज्ञान का आगार रहा है। पश्चिमी जगत में 17वि सदी तक वैज्ञानिकों की यह मान्यता था की पृथ्वी सूर्य की नही बल्कि सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इसी विपरीत मान्यता के कारण ही वैज्ञानिक गैलिलियो को मृत्युदंड स्वीकार करना पड़ा। परन्तु भारतीय ऋषियों ने आदिकाल से ही इस सत्य का उद्घाटन आर्ष साहित्य में कर दिया था।

Rape in India (country of Ram)

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बलात्कार : हिन्दुत्व के संस्कारों का अवमूल्यन या पाश्चात्य प्रभाव मे इस्लामी उद्दीपन कई दिनो से पूरे देश मे बलात्कार के खिलाफ माहौल बना हुआ है (या बनाया गया है  इसके लिए यहाँ क्लिक करे) । बलात्कार के खिलाफ माहौल बनाया गया हो या माहौल स्वयंस्फूर्त हिन्दुस्थानी जनता की सरकारी निकम्मेपन के खिलाफ विषादयुक्त अभिव्यक्ति हो दोनों परिस्थितियों मे एक बात पर बिलकुल ही संशय नहीं है की सामाजिक मर्यादाएं टूट रही हैं। इस पर एक विस्तृत परिचर्चा की आवश्यकता होगी । बलात्कार जैसे जघन्य कृत्य का किसी भी प्रकार से समर्थन या आरोपी का बचाव खुद को बलात्कारी की श्रेणी मे खड़ा करने सदृश्य होगा॥ मगर एक प्रश्न जिसपर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है वो की  मर्यादा पुरुषोत्तम राम के देश मे मर्यादा का हनन क्यू हो रहा है क्या तथाकथित सभ्य समाज ने अपनी मान्यताएँ बदल दी हैं या मान्यताएं टूट रही हैं। हालाँकि व्यभिचार हर समय कही न कही न्यूनाधिक मात्र मे उपस्थित रहा है फिर भी  यदि भारतीय परिवेश मे देखें तो मुगल काल मे इस प्रथा का कई कारणो से बहुत प्रचार हुआ  इसका ज्वलंत स्तम्भ आगरे का मीना बाजार है जह...

Solution to corruption of India but None except 1 takes it in their agenda.

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अन्ना व बाबा के सवालों का सटीक जवाब है 'अर्थक्रांति' Monday, 15 August 2011 19:25 दिनेश चौधरी भड़ास4मीडिया -   लाइफस्टाइल छत्तीसगढ़ के एक छोटे-से कस्बे बालोद में स्थानीय महावीर विद्यालय का सभागार खचाखच भरा हुआ है। वातावारण में थोड़ी उमस भी है। व्याख्यान प्रारंभ हुए कोई दो घंटे हो चुके हैं, फिर भी लोगों की एकाग्रता भंग नहीं हुई है। मजे की बात यह है कि व्याख्यान किसी धर्मगुरु का नहीं है, जो सरस पौराणिक गाथायें सुनाकर श्रोताओं को बांधे हुए हो। दरवाजे की झिरियों से जो शब्द छनकर बाहर आ रहे हैं वे अर्थशास्त्र की किसी उबाऊ, मोटी व ठस्स किताबों से लिये हुये लगते हैं। राजकोषीय घाटा, वित्तीय पूंजी, दोहरी कराधान प्रणाली और सकल घरेलू उत्पाद जैसे भारी-भरकम शब्द कानों से टकराते हैं और सुनने वाला सोचता ही रह जाता है कि इस गांव-गंवई की सभा में इतने सारे अर्थशास्त्री कहां से इकट्‌ठे हो गये हैं? जब तक वह अपनी जिज्ञासाओं को शांत करे, श्रोताओं के सारे सवालों का जवाब देने के बाद अतुल देशमुख अपने लैपटाप को समेटते हुए सभागार के बाहर निकलने लगते हैं, क्योंकि उनकी अगली सभा छत्तीसगढ  के ही एक अन्य नगर ध...

आज भी चल रहे अंग्रेजो द्वारा बनाये गए काले कानूनों

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साथियों ,  व्यवस्था परिवर्तन क्यो जरूरी है ?   आजादी के 64 साल बाद भी देश मे सारे वही 34735 कानून अभी तक है, जो अन्ग्रेजों ने हमें लूटने कि लिये बनाये थे । भारत के काले कानून !! भारत में 1857 के पहले ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन हुआ करता था वो अंग्रेजी सरकार का सीधा शासन नहीं था | 1857 में एक क्रांति हुई जिसमे इस देश में मौजूद 99 % अंग्रेजों को भारत के लोगों ने चुन चुन के मार डाला था और 1% इसलिए बच गए क्योंकि उन्होंने अपने को बचाने के लिए अपने शरीर को काला रंग लिया था | लोग इतने गुस्से में थे कि उन्हें जहाँ अंग्रेजों के होने की भनक लगती थी तो वहां पहुँच के वो उन्हें काट डालते थे | हमारे देश के इतिहास की किताबों में उस क्रांति को सिपाही विद्रोह के नाम से पढाया जाता है | Mutiny और Revolution में अंतर होता है लेकिन इस क्रांति को विद्रोह के नाम से ही पढाया गया हमारे इतिहास में | 1857 की गर्मी में मेरठ से शुरू हुई ये क्रांति जिसे सैनिकों ने शुरू किया था, लेकिन एक आम आदमी का आन्दोलन बन गया और इसकी आग पुरे देश में फैली और 1 सितम्बर तक पूरा देश अंग्रेजों के चंगुल से आ...