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Showing posts from February, 2014

America Made Iran Iraq Fight for 10 years to sell its Bombs

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Sept. 22 – Iraq invaded Iran in a dispute over the Shatt al-Arab waterway. The war continued for eight years. Iran and Syria strengthened ties after Iraq's invasion, as Damascus provided Tehran with military and diplomatic support. http://iranprimer.usip.org/resource/timeline-irans-foreign-relations http://www.youtube.com/watch?v=W1pDaPBi78M   Rajiv Dixit on Iran Iraq war by America.

Valentine day History

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वैलेंटाइन डे की कहानी वैलेंटाइन डे की कहानी यूरोप (और अमेरिका) का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वास करता है पत्नियों में नहीं, यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या महिला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परंपरा है उनके यहाँ | आपने एक शब्द सुना होगा "Live in Relationship" ये शब्द आज कल हमारे देश में भी न... व-अभिजात्य वर्ग में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि "बिना शादी के पति-पत्नी की तरह से रहना" | तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है, खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो ने लिखा है कि "मेरा 20-22 स्त्रियों से सम्बन्ध रहा है" अरस्तु भी यही कहता है, देकार्ते भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि "एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It's Highly Impossible" | तो वहां एक पत्नीव्रत जैसा कुछ होता नहीं | और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि "स्त्...

Pathri (Stone) Ayurvedic Treatment ilaaj

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मित्रो, जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं ) क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए| आयुर्वेदिक इलाज ! ______________ पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!! होमियोपेथी इलाज ! ______________ अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे| वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये| (ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है ) अब इस दवा की 10-15 बूंदो...

shanti paath

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शांति पाठ ओम ध्ह्यो: शान्तिः आन्तरिक्षम शान्तिः पृथिवी शान्तिः आपः शान्तिः औषधयः शान्तिः वनस्पतयः शान्तिः विश्वेदेवाः शान्ति-ब्रह्मः शान्तिः सर्वं शान्तिः सा मा शान्तिः एधि । ओम शान्तिः शान्तिः शान्तिः ओम । - यजुर्वेद May the sky give peace to me !May the air give peace to me ! May the earth give peace to me ! May the vegetation and herbs give peace to me ! May all divines give peace to me ! May Brahma give peace to me ! May the Universe give peace to me ! May the Peace come to me from every quarter ! शांति दीजिये , शांति दीजिये जल से  थल से , शांति दीजिये शांति दीजिये अंतरिक्ष से शांति दीजिये वन्य वृक्ष से शांति औषध से मिले प्रभु और बनस्पति से मिले प्रभु शांति सब ब्रह्माण्ड में हो शांति जीवन कांड में हो

Ayurvedic Ilaaj Chune se (Ayurvedic treatment from Chuna)

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‎****ध्यान रहे पथरी के रोगीओं के लिए चुना वर्जित है**** राजीव दीक्षित Rajiv Dixit चुना जो आप पान में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर देते है । जैसे किसीको पीलिय ा जो जाये माने जोंडिस उसकी सबसे अछि दावा है चुना ; गेहूँ के दाने के बराबर चुना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है । और येही चुना नपुंसकता की सबसे अछि दावा है - अगर किसीके शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चुना पिलाया जाये तो साल देड साल में भरपूर शुक्राणु बन्ने लगेंगे; और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अछि दावा है ये चुना । बिद्यार्थीओ के लिए चुना बहुत अछि है जो लम्बाई बढाती है - गेहूँ के दाने के बराबर चुना रोज दही में मिलाके खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिलाके खाओ, दाल नही है तो पानी में मिलाके पियो - इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है । जिन बछोकी बुद्धि कम काम करती है मतिमंद बच्चे उनकी सबसे अछि दावा है चुना, जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चुना खिलाने से अछे हो जा...

Trifala churan

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आर्य विपुल दोशी आज के समय में व्यक्ति अपने खान-पान और अनियमित जीवनशैली के कारण अपनेआप पर ध्यान नहीं दे पाता, नतीजन वह कई बीमारियों का शिकार हो जाता है और इन बीमारियों में कब्ज, थकान होना, नींद न आना इत्यादि है। इनके इलाज के लिए व्यक्ति दवाईयों का लगातार सेवन करता रहता है, जिससे वह कई और बीमारियों का शिकार हो जाते है। लेकिन यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरतकर और आयुर्वेद को अपनाए तो अपने स्‍वास्‍थ्‍य की सही तरह से देखभाल कर ही पाएंगे साथ ही शरीर का कायाकल्प भी करने में आसानी होगी। त्रि‍फला ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधी है जो शरीर का कायाकल्प कर सकती है। त्रि‍फला के सेवन से बहुत फायदें हैं। स्वस्थ‍ रहने के लिए त्रि‍फला चूर्ण महत्वपूर्ण है। त्रि‍फला सिर्फ कब्ज दूर करने ही नहीं बल्कि कमजोर शरीर को एनर्जी देने में भी प्रयोग हो सकता है। बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की | सेवन विधि - सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें | इस नियम का कठोरता से पालन करें | यह तो हुई साधारण विधि पर आप कायाकल्प के लिए नि...

अमेरिकी फंदे में दम तोड़ता पेट्रो राष्ट्रवाद और इश्लामिक स्तम्भ :

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विगत दिनों एक खबर मीडिया में जोर शोर से आई की  कर्नल मुअम्मर गद्दाफी  की उसी के देश के  बिद्रोहियों ने निर्मम हत्या कर दी.दरअसल  कर्नल मुअम्मर गद्दाफी की हत्या अमेरिकी और पश्चिमी देशो के आर्थिक अतिक्रमण की एक अगली कड़ी है.. जिसमे अमीरीकी कंपनियों का तेल का खेल अभीष्ट है.. अमरीका और उसके मित्र देशों  के इतिहास पर नजर डाले तो अपने आर्थिक साम्राज्यवाद एवं मंदी को दूर करने के लिए हर समय सुविधा के अनुसार सत्ताएं बनायीं और फिर उनसे समय समय पर युद्ध करके   अपना आधिपत्य साबित किया .. अगर विश्लेषण करे तो प्रथम एवं द्वितीय दोनों विश्व युद्ध का कारण आर्थिक था जो यूरोप और अमेरिका की आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए किया गया... सोवियत रूस के विघटन के बाद अमरीका की गिद्ध  दृष्टि भारत और तेल उत्पादक देशों पर लगी हुए है..इसी उद्देश्यपूर्ति के लिए उसने लादेन जैसा भस्मासुर पैदा किया..हुस्नी की मुबारक की सत्ता को समर्थन दिया..तो कभी सद्दाम हुसैन के साथ भी गलबहियां डाली...अब धीरे धीरे पेट्रो राष्ट्रवाद और इश्लामिक जेहाद की आँच अम...

हिन्दू मंदिरों में पूजा के अधिकार पर प्रतिबन्ध??

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बंधुओं बचपन में जिस  क़स्बे   में पला - बढा वहां पास में एक मस्जिद है सुबह सुबह " अल्लाह हो अकबर "  की गूंज सुनाई देती थी  I  कभी कभी किस के इंतकाल की खबर भी लाउडस्पीकर के माध्यम से सुनता था  I कुछ भी समझ में नहीं आता था मगर ये मानते हुए की किसी धर्म विशेष   की आस्था का विषय है मन ही मन नमन कर लेता था उस परमपिता को  I वैसे भी सहिष्णु हिन्दू धर्म में हर धर्मस्थल पर शीश नवाना कोई नयी बात नहीं है I एक और बचपन की घटना साझा करना चाहूँगा ,  एक बार पास के गांव में खेतों के बीचो बिच कुछ सफ़ेद रंग की चबूतरे जैसे आकृतियाँ बनी हुई थी कुछ लोग दूसरी और अपने काम में व्यस्त थे , गलती से मै एक चबूतरे पर चढ़ गया मेरे साथ के एक मित्र ने तुरंत मुझे टोका की " अबे किस पर चढ़ा है ये कब्र किसी की  "  इस प्रकार कब्र से मेरा पहला परिचय हुआ  I  जैसा की हिन्दू धर्म का स्वाभाविक गुण है मैं तुरंत वहां से नीचे उतर कर अपनी गलती सुधारते हुए कब्र पर दोनों हाथ जोड़ते हुए सर झुकाने   लगा , तभी खेत से एक चचाजान का मिट्टी से सने हाथो के साथ आना हुआ और उन...

Bharat aur uski sanskriti ko jaane..

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‎*** अपने भारत की संस्कृति को पहचानें *** * दो पक्ष - कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष ! * तीन ऋण - देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि त्रण ! * चार युग - सतयुग, त्रेता युग, द्वापरयुग एवं कलयुग ! * चार धाम - द्वारिका, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पूरी एवं रामेश्वरम धाम ! * चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम), गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) एवं श्रन्गेरिपीठ ! * चर वेद- ऋग्वेद, अथर्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद ! * चार आश्रम - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, बानप्रस्थ एवं संन्यास ! * चार अंतःकरण - मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार ! * पञ्च गव्य - गाय का घी, दूध, दही, गोमूत्र एवं गोबर , ! * पञ्च देव - गणेश, विष्णु, शिव, देवी और सूर्य ! * पंच तत्त्व - प्रथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश ! * छह दर्शन- वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मिसांसा एवं दक्षिण मिसांसा ! * सप्त ऋषि - विश्वामित्र, जमदाग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्री, वशिष्ठ और कश्यप ! * सप्त पूरी - अयोध्या पूरी, मथुरा पूरी, माया पूरी ( हरिद्वार ), काशी, कांची (शिन कांची - विष्णु कांची), अवंतिका और द्वारिका पूरी ! * आठ योग - यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धा...

RSS Rashtriya swayam sevak sangh

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Basic FAQ on RSS HINDI संघ का पूरा नाम क्या है ? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। संघ के संस्थापक कौन है ? डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार। डॉ. जी स्वातंत्र्य सेनानी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में ही समर्पित किया था। संघ की स्थापना कहाँ और कब हुई ? नागपुर में, 1925 में। संघ का सदस्य कौन बन सकता है ? कोई भी हिंदू पुरूष संघ का सदस्य बन सकता है | संघ की सदस्यता की प्रक्रिया क्या है ? संघ सदस्यता की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। कोई भी व्यक्ति नजदीक की संघ शाखा में जाकर संघ मेंसम्मिलित हो सकता है। संघ सदस्य को स्वयंसेवक कहते है। उसके लिए कोई भी शुल्क या पंजीकरण प्रक्रिया नहीं है। संघ के कार्यक्रमों में गणवेष क्यों होता है ? क्या यह स्वयंसेवक बनने के लिए अनिवार्य है ? उसको कैसे प्राप्त किया जाता है ? संघ में शारीरिक कार्यक्रमों के द्वारा एकता का, सामूहिकता का संस्कार किया जाता है। इस हेतू गणवेष उपयुक्त होता है।परन्तु गणवेष विशेष कार्यक्रमों में ही पहना जाता है। नित्य शाखा के लिए वह अनिवार्य नहीं है। गणवेष कीउपयुक्तता ध्यान में आने पर हर स्वयंसेवक अपने खर्चे से गणवेष की पूर्ति करता ...

गाय बची तो ही हिन्दू

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गाय बची तो ही हिन्दू और मुसलमान बचेगा -हरपाल सिंह भारत की संस्कृति, समृद्वि और सभ्यता का आधार गंगा, गौ, गायत्री, गीता और गुरु ही रही है। भारत की संस्कृति प्रकृति मूलक संस्कृति है। दुनिया के प्राचीनतम ग्रन्थ वेदो में कण-कण के प्रति अहोभाव की अभिव्यक्ति है। हमने सूर्य-चन्द्र, ग्रह नक्षत्र, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, पेड़-पौधों को पूज्य माना है। प्रकृति का कण-कण हमें देता है। इसीलिए कण-कण में देवाताओं का निवास माना है। इस प्राकृतिक संरचना में गाय को हमने विशेष दर्जा दिया है। उसे कामधेनु तथा सर्व देव मयी गौ माता माना है। वह हमें दूध, दही, घी, गोबर-गोमूत्र के रूप में पंचगव्य प्रदान करती है। सृष्टि की संरचना पंचभूत से हुई है। यह पिंड, यह ब्रहमाण्ड,पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश रूप पंचभूतों के पांच तत्वो से बना है। इन पंचतत्वो का पोषण और इनका शोधन गोवंश से प्राप्त पंच गव्यों से होता है। इसीलिए गाय को पंचभूत की मां कहां गया है। ‘मातर: सर्व सुखप्रदा:। इस प्रकार वह प्रकृति की माता है। वह गोबर से धरती को उर्वरा बनाती है। जल और वायु का शोधन करती है। हमें अग्नि व ऊर्जा प्रदान करती है। आकाश को निर्मल और ...