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Showing posts from October, 2013

बासमती चावल 100% प्राकृतिक आर्डर करें।

नमस्कार दोस्तों... 100% शुद्ध प्राकृतिक बासमती चावल 1121 किस्म, लम्बा और पतला चावल. (हमारा भाव 100-130 रूपये प्रति किलो) आर्गेनिक का बाज़ार भाव 150-250 रूपये प्रति किलो. जहर वाले का भाव 85-220 रूपये प्रति किलो. हमने शुन्य लागत प्राकृतिक खेती तकनीक (zero budget natural farming by Subhash Palekar)  से kheti karna shuru kiya tha June 2013 me.  अभी हमारे पास बासमती चावल आर्डर के लिए तैयार है.  हमारा उद्देश्य :- आर्गेनिक फ़ूड सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं बल्कि देश के आम आदमी के लिए भी होना चाहिए. इसलिए हम सभी आर्गेनिक कंपनियों से सस्ता प्राकृतिक फ़ूड देंगे. हमारा भाव जहर वाले भोजन से २-३ गुना नहीं होगा, बल्कि हमारे भाव का आधार किसान की लागत और उसको सम्मानजनक जीवन पर निर्भर होगा. सरकार की नीतिओ से किसान को बर्बाद किया जा रहा है. खेती एक अकेला ऐसा उद्योग है जिसमें किसान की उपज का भाव वो खुद तय नहीं करता, बल्कि विदेशी एजेंट और सरकारी भ्रस्त तंत्र करता है. नतीजा किसान की आत्महत्या. लोग खेती छोड़कर शहर में 5000 रूपये की नौकरी के लिए भागते हैं. जरा सोचिये अगर किसान ने खेती बंद कर दी ...

3 November 2013 Dipawali Pujan vidhi...

http://www.brandbihar.com/hindi/literature/hindu_dharma/goddess_lakshmi.html

शादियों पर फिजूलखर्ची

शादियों पर फिजूलखर्ची - उत्सव बन गया अभिशाप घर में शादी का जिक्र आते ही सारा परिवार कभी चहकने लगता था। बूढ़े-जवान-बच्चे, सभी शादी में अपने-अपने हिस्से की खुशी ढूंढ़ने लगते थे। छ: महीने पहले ही गेहूँ साफ होने लगते थे, दर्ज़ी दो महीने पहले घर बैठ जाता था। बहन-बुआ, महीने भर पहले पीहर बुला ली जाती थी। 15 दिन पहले नाचना-गाना शुरू हो जाता था। रिश्तेदार-मोहल्ले वाले, गली को रंगमंच बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। एक नितान्त पारिवारिक समारोह। अपनी संस्कृति में रंगा उत्सव।  आज शादी का नाम आते ही उत्सव से अधिक मजबूरी का अहसास होने लगता है। सब तरफ परेशानी ही परेशानी। टेंट की, कपड़ों की, सोने की, घी-शक्कर की, हलवाई की। जाने क्या-क्या। यहाँ समाज के मध्यम और निम्र वर्ग की बात हो रही है। यह ध्यान रखे। दिखावे के सिरमौर उच्च वर्ग के लिए तो यह शान दिखाने की घटना होती है। हालांकि 'उत्सव' या 'आनन्द' से तो वे भी कोसों दूर होते हैं। समाज के उस 5 प्रतिशत या हद से हद 10 प्रतिशत हिस्से को फिलहाल भूल जाइये। यहाँ जिक्र हो रहा है, एक कर्मचारी का, एक साधारण किसान का, छोटे व्यापारी का, अध्यापक का, ...